हर घर में दो सिलेंडर! डेढ़ करोड़ घरों में PNG कनेक्शन, जानें देश में कुल LPG सिलेंडर की संख्या

नई दिल्ली

युद्ध की वजह से कई देशों में तेल और गैस की किल्लतें बढ़ती जा रही हैं. भारत संकट से पहले अलर्ट हो गया है, और जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. सरकार का कहना है कि देश के लोग घबराएं, फिलहाल तेल और गैस को लेकर कोई संकट नहीं है।

दरअसल, 140 करोड़ आबादी वाले देश भारत तेल और रसोई गैस के लिए काफी हदतक दूसरे देशों पर निर्भर है. यानी सीधा रसोई से जुड़ा हुआ मामला है, गैस की किल्लत की खबर से लोग परेशान हैं. लेकिन खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हालात पर नजर बनाए हुए हैं, और जरूरी आदेश दे रहे हैं, ताकि देश में रसोई गैस की कोई किल्लत न हो।

केंद्र सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार देश में करीब 33 करोड़ घरेलू LPG कनेक्शन हैं. अधिकतर घरों में दो सिलेंडर होते हैं, इस हिसाब से देश में LPG सिलेंडर कुल संख्या करीब 66 करोड़ तक हो सकती है. इनमें से बड़ी संख्या प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत दिए गए कनेक्शनों की है, जिससे ग्रामीण और गरीब परिवारों तक भी रसोई गैस की पहुंच बढ़ी है. इसके अलावा देश में कमर्शियल सिलेंडर की संख्या भी करोड़ों में है। 

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देश में 33 करोड़ गैस कनेक्शन 
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2014 में देश में LPG कनेक्शनों की संख्या लगभग 14.5 करोड़ थी. पिछले 10 वर्षों में यह संख्या करीब दोगुनी होकर 33 करोड़ तक पहुंच गई है. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत करीब 10.4 करोड़ गरीब परिवारों को मुफ्त या सब्सिडी वाले LPG कनेक्शन दिए गए हैं. गांव-गांव तक रसोई गैस की उपलब्धता बढ़ाने के लिए देशभर में गैस एजेंसियों और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का भी तेजी से विस्तार किया गया है.

दूसरी ओर, शहरों में पाइप के जरिए घरों तक गैस पहुंचाने की व्यवस्था यानी PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) भी धीरे-धीरे बढ़ रही है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार फिलहाल देश में करीब 1.5 करोड़ घरों में PNG कनेक्शन उपलब्ध हैं. यह सुविधा मुख्य रूप से महानगरों और बड़े शहरों में उपलब्ध है,  जहां सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के जरिए घरों तक पाइपलाइन से गैस पहुंचाई जाती है. 

PNG नेटवर्क का इस्तेमाल केवल घरों तक ही सीमित नहीं है. इसके अलावा देशभर में करीब 45 हजार से ज्यादा कमर्शियल प्रतिष्ठान, जैसे होटल और रेस्टोरेंट, 20 हजार से ज्यादा उद्योग भी पाइप गैस का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे ऊर्जा आपूर्ति अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित मानी जाती है, क्योंकि इसमें सिलेंडर की जरूरत नहीं होती है. 

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PNG की सप्लाई बड़े शहरों में 
यही नहीं, सरकार आने वाले वर्षों में PNG नेटवर्क का और विस्तार करने की योजना बना रही है. पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन परियोजनाओं के माध्यम से 2032 तक करीब 12.5 करोड़ घरों तक PNG पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए देश के कई नए शहरों और जिलों में गैस पाइपलाइन बिछाने का काम जारी है. 

हालांकि फिलहाल भारत में रसोई गैस की जरूरतों का बड़ा हिस्सा LPG सिलेंडरों के जरिए ही पूरा होता है, क्योंकि PNG नेटवर्क अभी सीमित शहरों तक ही पहुंच पाया है. भारत में साल 2025 के आसपास लगभग 31–33 मिलियन मीट्रिक टन LPG की खपत हुई. इस हिसाब से लगभग 85 हजार टन LPG की रोजाना खपत होती है. जबकि भारत की कुल प्राकृतिक गैस खपत लगभग 188 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (MMSCMD) के आसपास है. 

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इसके अलावा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत के पास करीब 8 हफ्ते का तेल भंडार उपलब्ध है. भारत के तेल आयात का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है और इसका एक महत्वपूर्ण भाग होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते से गुजरता है. जिस वजह से वैश्विक स्तर पर संकट दिख रहा है. 

बता दें, भारत ने जोखिम कम करने के लिए पिछले कुछ वर्षों में अपनी रणनीति बदली है. देश ने रूस, अमेरिका और अफ्रीकी देशों से भी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई है. लेकिन अगर वैश्विक स्तर पर लंबे समय तक तेल संकट बना रहता है तो इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों, महंगाई और देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है. इस बीच राहत की बात ये है कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट देखी जा रही है. ब्रेंट क्रूड की कीमत सोमवार की हाई 120 डॉलर प्रति बैरल से फिसलकर 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है.

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